पंजाब के संगीत में आरंभ से ही एक प्रवाहमयता, ताज़गी तथा नवीनता है जो इसको अन्य क्षेत्र के संगीत से पृथक करती है. पंजाब में शास्त्रीय संगीत की परंपरा एवं विकासधारा अधिक परिपक्व एवं परिष्कृत है. वही अगर यहां के वाद्य वादन की बात करें तो अवनद्ध वाद्यों की परंपरा की जड़े अति गहन प्राप्त होती हैं जिसमें जोड़ी वाद्य (धामा) का गुरूमति संगीत में बहुत योगदान रहा है. जोड़ी वाद्य रबाबी घराने द्वारा पंजाब को एक विशिष्ट देन है जो अतीत से वर्तमान तक अपनी अलग पहचान एवं महत्व को उजागर कर रहा है. वास्तव में, पंजाब घराना, पंजाब के क्षेत्र से संबंधित, कई घरानों का प्रतिनिधित्व करता है जैसे कि लाहौरी घराना (जिसे उस्ताद मियां कादिर बख्श व उनके शिष्यों के रूप में देखा गया), कसूर घराना, नाईयां दा घराना, रबाबी घराना. प्रस्तुत शोध पत्र में गुरूमति संगीत के साथ प्रयुक्त जोड़ी वाद्य की परंपरा को और कतिपय नामी कलाकारों को रेखांकित करने का प्रयास किया गया है.
Shrivastav, Anupurna. "(Gurumati Sangeet me Jodi Vadan ki Parampra) गुरुमति संगीत में जोड़ी वादन की परम्परा." Sangeet Galaxy, vol. 12, no. 2, July 2023, pp. 159-164.