Tabla Sangat ke Aadarsh Purush – Pandit Eshwar Lal Mishra

Abstract

संगीत एक अद्भुत कला है। यह हृदय की भाषा है। ‘स्वर एवं लय’ संगीत के मुख्य दो उपकरण है। स्वरों से रागों की रचना हुई और लय से ताल की। गायन, वादन एवं नृत्य तीनों को समन्वित रूप से आधार प्रदान करना ‘ताल’ का कार्य है। वर्तमान समय में ताल का प्रमुख साधन ‘तबला’ अवनद्ध वाद्यांे में सबसे लोकप्रिय तालवाद्य है। तबले का इतिहास हमारे देश के लिए अत्यन्त गौरवपूर्ण रहा है। हमारे देश में अनेक मूर्धन्य तबला वादक पैदा हुए है। बनारस घराने ने तो पुरातन काल से उद्भट तबला वादकांे की एक श्रृंखला कायम कर रखी है। उसी गौरवशाली श्रृंखला की कड़ियों में विश्वविख्यात तबला वादक, वरिष्ठ गुरू एवं तबला-संगत के आदर्श पुरूष पं0 ईश्वर लाल मिश्र जी हैं।

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Citation

Kratan, P, and ay. "Tabla Sangat ke Aadarsh Purush – Pandit Eshwar Lal Mishra." Sangeet Galaxy, April 2013, pp. 1-7.

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