Bhartiya Sangeet Ka Adhyatmvadi Chintan

Abstract

प्रस्तुत शोधपत्र में भारतीय संगीत का अध्यात्मिक दृष्टिकोण से विवेचन प्रस्तुत किया गया है। प्रथम नाद ओंकार ही सृष्टि की उत्पत्ति का आधार है और यह संसार ही नाद के अधीन है। नाद ही संगीत का कारण है और सृष्टि कर्ता के अनुपम वरदान के रूप में प्रकृति के कण-कण में यह विद्यमान है। आज समस्त विश्व, संगीत के इन्हीं सात स्वरांे की चमत्कारिक शक्ति के रहस्यों को विज्ञान में ढूंढ़ रहा है लेकिन नाद वेद तो अपरंपार है और अध्यात्मिक चेतना की जागृति के बिना संगीत का आनन्द ही अधूरा है। भारतीय दर्शन में तो वेदों, उपनिषदों, और शास्त्रों में नाद साधना की महिमा का महात्मय भरा पडा़ है और इसे मनुष्य जीवन के परम लक्ष्य मोक्ष का साधन माना गया है। संगीत लोकानुरंजन से लेकर मनुष्य की अध्यात्मिक उन्नति मे सहायक है। इन्हीं कुछ तथ्यो का आधार परक अध्ययन प्रस्तुत है जिससे संगीत का अध्यात्मिक संबंध प्रगट होता है।

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Citation

Tripathi, Deepak Kumar. "Bhartiya Sangeet Ka Adhyatmvadi Chintan." Sangeet Galaxy, July 2016, pp. 35-40.

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