भारतीय वाड्.मय में प्राचीनतम् गन्थ वेद है।1 सामवेद का संगीत की दृष्टि से विशिष्ट स्थान है। इसमें भारतीय संगीत का अनादि स्वरूप प्रथम बार अभिव्यंजित हुआ है।2 वैदिक युग की अभिव्यक्ति सामूहिक थी, जिसमें गेयत्व की प्रधानता थी। वैदिक साहित्य के प्रणयन से पहले ही साहित्य, सभ्यता और संस्कृति के अन्तर्गत कई वाद्यों का जन्म और प्रचार हो चुका था। गायन के साथ वाद्यों का भी प्रयोग होता रहा है। डॉ॰ परांजपे के अनुसार ऋग्वेद में निम्न वाद्यों का उल्लेख पाया जाता है -दुन्दुभि वाण, नाली, कर्करि , गोधा , पिंग और आघाति। इसमें दुन्दुभि के अतिरिक्त अन्य वाद्यांे का स्वरूप - निर्णय वर्तमान स्थिति मंे संदिग्ध है। प्रकृति की ही गोद मंे विभिन्न वाद्यों ने भी अपना शैशव व्यतीत किया। ऋग्वेद में अनेक मंत्रो में स्तुतियॉ मिलती है, जिसमें वाद्यों की अभिव्यक्ति है।
Mishra, Kavita. "Vaidik Yug me Avnaddhya Vadya." Sangeet Galaxy, January 2018, pp. 58-64.