संगीत में भाव एवं भावाभिव्यक्ति का एक प्रमुख स्थान है। किसी भी प्रकार के संगीत में भाव की उपेक्षा नहीं की जा सकती। भावाभिव्यक्ति के लिए वैसे तो अनेक कारक उत्तरदायी होते हैं परन्तु संगीत में प्रयोग होने वाले विभिन्न स्वरों के स्वरांतरों का भाव निर्मिति में एक विशिष्ट स्थान होता है। विभिन्न स्वरांतर एवं उनको प्रयोग करने का क्रम भाव सम्प्रेषण में विशिष्ट भूमिका निभाता है। स्वरांतरों का क्रम परिवर्तित करने पर राग एवं उससे उत्पन्न होने वाला भाव भी परिवर्तित हो सकता है। प्रस्तुत शोध पत्र में विभिन्न स्वरान्तरों में निहित भाव एवं उनके विभिन्न संयोजन से उत्पन्न होने वाले राग®ं द्वारा भावाभिव्यक्ति में उनकी भूमिका का विश्लेषण किया गया है।
Devan and Pathak. "Sangitik Bhavabhivyakti me Swarantar ki Bhoomika." Sangeet Galaxy, July 2018, pp. 12-18.