Bhartiya Sangeet ke Itihas me Sangeet Samarohon ka Swaroop (Vaidik Kaal se Gupt Kaal ke Sandarbh me)

Abstract

भारत वर्ष सदैव अपनी संस्कृति के लिए विश्वविख्यात रहा है तथा भारतीय संस्कृति की आधार नींव उसका संगीत है क्योंकि देश की कला उसका संगीत ही देश की संस्कृति की आत्मा व पहचान होती है. भारत में संगीत वैदिक काल से ही धर्म के साथ सम्बद्ध किया गया है, जैसे-जैसे मानव आध्यात्मिकता की ओर बढ़ा है संगीत कला की भी उन्नति हुई है. वैदिक काल से ही संगीत कला तथा संस्कृति को संवर्धित, सुरक्षित तथा प्रसारित करने की परम्परा रही है जिसके लिए वैदिक काल से ही समाज में संगीत उत्सवों का आयोजन विभिन्न नामों तथा स्वरूपों में किया जाता रहा है. इन उत्सवों के माध्यम से ही हम उस युग की संगीत कला, उनकी विधाओं, शैली तथा कलाकारों से परिचित हो पाते हैं तथा इन संगीत समारोहों के स्वरूप से हम भिन्न भिन्न कालों में उनके आयोजनों में निहित समारोहों के उद्देश्यों को भी समझ पाते हैं क्योंकि उस समय ये संगीत उत्सव ही संगीत के प्रसार और विकास का माध्यम होते थे. अपने इस शोध पत्र में मैने संगीत समारोहों के स्वरूपों का उल्लेख वैदिक से गुप्त काल के अन्तर्गत किया है.

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Citation

Srivastava, Smita. "Bhartiya Sangeet ke Itihas me Sangeet Samarohon ka Swaroop (Vaidik Kaal se Gupt Kaal ke Sandarbh me)." Sangeet Galaxy, vol. 9, no. 2, July 2020, pp. 50-56.

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