ग्वालियर घराने में टप्पा एवं टप्पख़्याल- एक अवलोकन

Abstract

ह दिं स्ुतानी शास्त्रीय सिंगीत अपनी परिंपरा व सिंगीत शैहियों केहिए प्रहसद्ध ै, हिन् ेंघरानेकेरूप मेंिाना िाता ै. घराना, एक व्यापक सिंगीत सिंबिंधी हवचारधारा को इहिंगत करता ै. य सिंगीत के हशक्षण, हवचारधारा, प्रदशशन व प्रशिंसा को प्रभाहवत करता ै.19वीं सदी सेह दिं स्ुतानी शास्त्रीय सिंगीत केघरानोंद्वारा ख़्याि गायन शैिी समद्धृ ुई. इसी ख़्याि शैिी के कुछ घरानेिैसी- ग्वाहियर, ियपुर, आगरा, हकराना आहद प्रहसद्ध ुए. इन सभी घरानों का सिंदभशहबिंदुग्वाहियर घरानेको माना िाता ै. ग्वाहियर घरानेकी गायकी मेंख़्याि के साथ-साथ टप्पा गायन भी प्रचहित ै. टप्पा गायन शैिी मेंमुकी, कण, खटका व छोटी-छोटी तानों का प्रयोग हकया िाता ै. इसी शैिी का ख़्याि गायन शैिी सेसुिंदर सहममश्रण कर ‘टप्पख़्याि’ गायन शैिी का उद्भव ुआ. ग्वाहियर घरानेमें‘टप्पा' एविं ‘टप्पख़्याि’ शैहियााँअहधक प्रचहित र ीं व इस घरानेकेकई प्रख्यात किाकारों नेइन गायन शैहियों को हशखर तक प ुचाँ ाया. प्रस्तुत शोध पत्र द्वारा ग्वाहियर घरानेमेंटप्पा एविंटप्पख़्याि शैहियों का प्रचिन एविं गायकी पर प्रकाश डािा गया ै. टप्पेपर आधाररत हकताबें, िेखन, अन्य शोध पत्र एविंध्वहन मुद्रण, प्रस्ततु शोध पत्र केस्रोत ैं.

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Citation

सिंह, रिद्धिमा. "ग्वालियर घराने में टप्पा एवं टप्पख़्याल- एक अवलोकन." Sangeet Galaxy, vol. 14, no. 1, 2025, pp. 303-307.

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