नाट्यशास्त्र भारतीय कला और संस्कृतत का प्रतततनतित्व करनेवाला सववश्रेष्ठ ग्रन्थ है. भरत मुतन कृत नाट्यशास्त्र
नाट्यकला का तो संसार का सबसेप्राचीन ग्रंथ हैही, भारतीय संगीत का भी यह आद्य ग्रन्थ माना जाता है. यदत्िस्वयं
भरत मुतन न े “गांिववमेतत्कतथतंमया तह िूवंयदुक्तंतत्वह नारदेन” कह कर अिनेसेिूवववती एक समद्धृ संगीत िरम्िरा
की ओर इतंगत तकया ह, ै तकन्तुनाट्यशास्त्र सेिूवववती कोई भी संगीत का शास्त्र ग्रन्थ आज उिलब्ि नहीं है. अतएव
नाट्यशास्त्र कोही भारतीय संगीत शास्त्र का प्रारतम्भक व आिार ग्रन्थ माना जाताह.ैिरवती समस्त संगीत सम्प्रदाय व
शास्त्र ग्रन्थ अिनी समसामतयक िरम्िराओंका यतत्कंतचत आख्यान करतेहुए भी मुख्य रूि सेनाट्यशास्त्र का ही
अनुगमन करतेह.ैंअतः संगीत के प्रत्येक अध्येता केतलए भरत केसंगीत तसद्धान्त को जान लेना िरमावश्यक ह.ैइसी
िररप्रेक्ष्य से प्रस्तुत शोि ित्र केमाध्यम सेनाट्यशास्त्र में वतणवत ताल-तत्व का सैद्धातन्तक तववेचन संक्षेितः प्रस्तुत करने
का प्रयास तकया गया है.
सिंह, रितु. "नाट्यशास्त्र में वर्णित ताल-तत्व: एक अध्ययन." Sangeet Galaxy, vol. 13, no. 2, July 2024, pp. 292-299.