भारतीय सिनेमा में सत्यजित राय को एक महान निर्देशक के रूप में जाना जाता है. उनकी फ़िल्मों के विषय में जितनी बात की जाए, वह कम पड़ जाती है. चाहे फ़िल्मों का कथानक हो, पटकथा की बुनावट हो, अभिनय की सूक्ष्मता और चारित्रिक गठन हो, साहित्यिक रूपांतरण हो या फिर ध्वनि-संगीत के संयोजन की बात हो, वे सब में सिद्धहस्त रहे हैं. यही कारण है कि कोई सिनेमा अध्येता या सिनेमा अध्ययन से जुड़ा व्यक्ति उनके फ़िल्मों पर बात किए बगैर नहीं रह सकता है. आज हम उनके उत्कृष्ठ सिनेमाई कृतियों में हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत और संगीतकार पर बात करेंगे जोकि एक अनछुआ विषय है. चूँकि सत्यजित राय ने अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत ही विविध शास्त्रीय गायकों और वादकों के संगीत के प्रयोग से किया. उनकी फ़िल्मों में संगीत जहाँ एक ओर महान सितार वादक पंडित रविशंकर ने दिया, तो वहीं दूसरी ओर सुप्रसिद्ध सितार वादक उस्ताद विलायत ख़ां ने दिया. इसके साथ ही साथ सरोद वादक और मैहर घराने से तल्लुक रखने वाले शास्त्रीय संगीतज्ञ अली अकबर खान ने भी अपने संगीत से राय की फ़िल्मों को ऊँचाइयों तक पहुँचाया. इन लोगों ने राय की शुरुआती दौर की प्रमुख फ़िल्मों- ‘पाथेर पांचाली’, ‘अपराजितो’, ‘अपुर संसार’, ‘पारस पत्थर’, तथा ‘जलसा घर’ आदि में शास्त्रीय संगीत की विविध राग-रागनियों के प्रयोग से भारतीय दर्शक से लेकर पश्चिम के दर्शक तक को हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत से रूबरू कराया. इस आलेख में हम विस्तृत तौर पर सत्यजित राय के फिल्मों में शास्त्रीय गायकों और उनके वाद्ययंत्रों व फ़िल्मी प्रयोग पर चर्चा करेंगे.
Kumar, Vikas. "Hindustani Shsatriya Sangeet ke Aaeene me Satyajit Ray ki Filme (हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के आईने में सत्यजित राय की फ़िल्में)." Sangeet Galaxy, vol. 12, no. 1, pp. 121-125.