यह लेख प्रसिद्ध तबला वादक पंसित शुभंकर बनर्जी और आसदत्य कल्याणपुर के बीच कोरोना महामारी केदौरान हुए
एक वचुअु ल िाक्षात्कार पर आधाररत है, सर्जिमेंिंगीत, िाधना, आत्मसचंतन और र्जीवन दशुन पर गहन चचाुहुई.
लेख मेंशुभंकर र्जी की िंगीतमय यात्रा, उनके गुरु-सशष्य िंबंध, अंतरराष्रीय अनुभव और तबलेके प्रसत उनका
आध्यासत्मक दृसिकोण सवस्तार िेप्रस्तुत सकया गयाह.ै यह िंवाद एक ऐिेिमय मेंहुआ र्जब मंचीय प्रस्तुसतयााँबंद थीं
और कलाकार आंतररक िाधना की ओर उन्मुख थे. इि लेख के माध्यम िेयह स्पि होता हैसक िंगीत केवल प्रस्तुसत
नहीं, बसल्क र्जीवन का मागुदशुन और आत्म-उन्नयन का माध्यम भी बन िकता है, सवशेषतः सवपरीत पररसस्थसतयों में.
पंसित शुभंकर बनर्जी केसवचारों और अनुभवों िेयह लेख युवा कलाकारों केसलए प्रेरणा का स्रोत बनताह.ै
उद्धव, शुभम चौहान और प्रो० प्रवीण. "कोरोना काल और तबला चिंतन: पंडित शुभंकर बनर्जी के विचारों की झलक." Sangeet Galaxy, vol. 14, no. 2, 2025, pp. 277-284.