ध्रुपद गायन शैली की विकास यात्रा: एक अध्ययन

Abstract

ध्रपुद गायन शैली भारतीय शास्त्रीय संगीत की वततमान मेंप्रचललत सबसेप्राचीनतम शैली के साथ ही शास्त्रीय संगीत का मूल आधार भी ह, ेक्योंलक इस शैली मेंहजारों वर्षों पूवतवैलदक कालीन संगीत का सवतत्र प्रभाव लदखाई देता है. भारतीय संगीत मेंप्रचललत लवलभन्न गीतशैललयों मेंध्रुपद का स्थान इसकी उच्चता, शुद्धता एवं गम्भीरता के कारण इसकी तुलना सूयतसेकी जाती ह.ै जो स्थान वततमान में ख्याल गायन शैली को प्राप्त है वहीं स्थान मध्यकाल मेंध्रपुद गायन शैली को प्राप्त था. अतः संगीत के प्रत्येक अध्ययनकतातके ललए ध्रपुद गायन जैसी आधारभूत गायन शैली को जानने की लनतान्त आवश्यकता है. इसी प्रररप्रेष्य मेंप्रस्तुत शोध पत्र के माध्यम सेयह अवगत कराने का प्रयास लकया गया है लक ध्रपुद अपने लकन-लकन उतार-चढ़ाओंसेगुजरा.उसे अपना स्थान बनाये रखनेके ललए लकन कलिनाइयों का सामना करना पड़ा तथा वततमान मेंध्रपुद के लवकास हतेुक्या प्रयास हो रहेहैं लजसेसंक्षेप मेंप्रस्तुत करनेका प्रयास लकया गयाह.ै

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Citation

मल्लिक, विभा पाण्डेय एवं प्रेम कुमार. "ध्रुपद गायन शैली की विकास यात्रा: एक अध्ययन." Sangeet Galaxy, vol. 14, no. 1, 2025, pp. 187-195.

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