ध्वनि विस्तारक यंत्रों के प्रयोग एवं आकाशवाणी के आगमन से तबला वादन में परिवर्तन

Abstract

विज्ञान ने विस प्रकार से अन्य क्षेत्रों में अपना प्रभाि विखाया है और नए-नए अविष्कारों से िीिन के कई क्षेत्रों में नए-नएपररिर्तनहुए. संगीर् का क्षेत्र भीउससेअछूर्ानहीं रहा. िैसेर्ो आविष्कार औरपररिर्तनहर युग मेंहुए, पर बीसिीं शर्ाब्िी मेंविर्नेआविष्कार हुए और नए-नए यंत्रों का विकास हुआ उर्ना पहलेकभी नहीं हआु . संगीर् पद्धवर् और शैली मेंपररिर्तन मुगल काल और उसकेपूितसेही होर्ा चला आ रहा हैपरंर्ुिैज्ञावनक पररिर्तन के वलए बीसिीं सिी का पूिातर्तमहत्िपूर्तह.ैनए-नए यंत्रोंनेिहांप्रचार और प्रसार मेंयोगिान विया िहीं िाद्य यंत्रों में सुर्ार भी हुआ. गायन और िािन शैली मेंभी पररिर्तन आया और स्िर मार्ुयतमेंभी पयातप्त सुर्ार हुआ. विवभन्न यंत्रों के विकास नेउसमेंएक क्ांवर् ला िी. प्रस्र्ुर् शोर्पत्र ध्िवन विस्र्ारक यंत्रों के प्रयोग और आकाशिार्ी के आगमन से र्बला िािन में िो पररिर्तन आए, उनको रेखांवकर् करनेका प्रयास ह.ै

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Citation

नाहर, प्रेम प्रकाश प्रजापति एवं शोभित कुमार. "ध्वनि विस्तारक यंत्रों के प्रयोग एवं आकाशवाणी के आगमन से तबला वादन में परिवर्तन." Sangeet Galaxy, vol. 14, no. 1, 2025, pp. 241-245.

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