सारांश
‘पाण्डुलिपि’ ऐतिहासिक ग्रन्थों का प्रामाणिक दस्तावेज है. सम्पुष्ट शोध-अध्ययन के लिए प्राचीन ग्रन्थों की पाण्डुलिपियाँ महत्वपूर्ण सहायक सिद्ध होती हैं. आज देश-भर में अनेक प्रतिष्ठान हैं जहाँ प्राचीन बहुमूल्य ग्रन्थों की पाण्डुलिपियाँ संरक्षित हैं. इन पाण्डुलिपियों का ग्रन्थ रूप में प्रकाशन और डिजिटलाइजेशन भी किया जा रहा है. संगीत के ये ग्रन्थ इन प्रतिष्ठानों द्वारा आज विशेष अध्ययन हेतु शोधकर्त्ताओ को उपलब्ध कराये जा रहे हैं. हमारी इस विशाल सांस्कृतिक विरासत का सर्वेक्षण, संग्रहण और संरक्षण कार्यों की उल्लेखनीय पहल उपर्युक्त प्रतिष्ठानों ने किया. इन प्रतिष्ठानों ने अपने उद्देश्यों की पूर्ति करने का निरन्तर प्रयास किया है. अनेक अलग-अलग स्थानों से अथवा दान में प्राप्त पाण्डुलिपियों को उपचार द्वारा संरक्षित करना और इनके सर्वेक्षण, संरक्षण, सम्पादन, प्रकाशन के बाद योग्य अकादमिक संस्थानों तथा शोध-जिज्ञासुओं तक लक्ष्यपूर्ति हेतु उपलब्ध कराना इन प्रतिष्ठिानों का उद्देश्य बन गया, जिससे भावी शोध में भरपूर सहायता प्राप्त हो सके. किसी भी अन्वेषण में ग्रन्थों की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है. प्रामाणिकता के लिए अनेक ग्रन्थों से तथ्यात्मक सामग्री एकत्र कर ही अध्ययन किया जा सकता है. भ्रामक तथ्यों को उजागर करने के लिए इन पाण्डुलिपियों और ग्रन्थों के अध्ययन के उपरान्त सही तथ्यों तक पहुँचा जा सकता है. इसके लिए आवश्यक है कि ग्रन्थों की उपलब्धता हेतु उनके मूल-प्राप्ति-स्थान को भी जानें.
अतः प्रस्तुत शोध पत्र में भारत के विभिन्न संग्रहालयों, संस्थानों आदि में संग्रहीत संगीत की पांडुलिपियों की उनके प्रकाशन सहित चर्चा की जा रही है. शोध पत्र में सर्वे विधि द्वारा प्राथमिक तथ्यों का संग्रह किया गया है.
'Kavya', Lawanya Kirti Singh. "पाण्डुलिपि, प्रतिष्ठान और प्राचीन संगीत ग्रन्थ (Pandulipi, Pratishthan Aur Pracheen Sangeet Granth)." Sangeet Galaxy, vol. 11, no. 2, July 2022, pp. 171-188.