फ़िल्मी संगीतकारों की पहचान का संकट: एक विश्लेषण (Filmi Sangeetkaro ki Pahchan ka Sannkat: Ek Vishleshan)

Abstract

फ़िल्म का एक गीत संगीतकार की कड़ी मेहनत और सोच का परिणाम होता है. गीतकार के बोल गायक की आवाज़ तथा वाद्यों का सन्तुलन कैसे बिठाना है यह सब संगीतकार के ज़िम्मे ही होता है. परन्तु प्रायः गीत तैयार होने पर संगीतकार कहीं हाशिये पर चला जाता है, उसे बताना पड़ता है कि ये गीत मैंने बनाया है. एक आम श्रोता तो ये भी नही समझता कि संगीत रचना जैसा भी कुछ होता है. वह तो अपने ज्ञान स्तर अनुसार फ़िल्म के नायक-नायिका या फिर गायक-गायिका को ही सब कुछ मान बैठता है. परिवेश के साथ आज बहुत परिवर्तन आया है. ऐसे में कार्यशैली तथा विचारों में परिवर्तन आना स्वाभाविक है. संगीतकार के योगदान तथा उपर्युक्त प्रश्न को एक जिज्ञासा के रूप में अनेक विद्वानों के मत जानने का प्रयास इस लेख में किया गया है. अनेक विद्वान सहमत हैं तो कुछ इस प्रश्न को आज के परिपेक्ष्य में निराधार मानते हैं. कुछ विद्वानों ने अपने मूल्यवान सुझाव भी दिए हैं. जिन पर विचार संभव है. प्रस्तुत शोध पत्र मूलतः विभिन्न संगीत विद्वानों से लिए है साक्षात्कारों के आधार पर जुटाए गए तथ्यों पर आधारित है.

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Citation

P, Anubhav and ey. "फ़िल्मी संगीतकारों की पहचान का संकट: एक विश्लेषण (Filmi Sangeetkaro ki Pahchan ka Sannkat: Ek Vishleshan)." Sangeet Galaxy, vol. 11, no. 2, July 2022, pp. 211-217.

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