Bhartiya Sanskriti ke Samanvayatmak Roop ka Moort Pratiroop Bhartiya Sangeet

Abstract

भारतीय शास्त्रीय संगीत की गौरवशाली धर्मनिरपेक्ष परंपरा, तथा उसके आत्मिक एवं आध्यात्मिक दर्शन की प्रासंगिकता जितनी आज के युग में है उतनी शायद ही कभी रही हो. यह युग सामाजिक, आर्थिक असमानता तथा धार्मिक राजनैतिक अस्थिरता का युग है. सूचना तंत्र ने मनुष्य को विश्व नागरिक तो बना दिया किन्तु अब आवश्यकता एक ऐसे सूत्र की है जो इस विश्व बंधुत्व को सप्रमाण सबके सामने प्रस्तुत कर सके. भारतीय शास्त्रीय संगीत ही वह सूत्र है जिसकी गंगा जमुनी धारा में न केवल भारतवर्ष वरन् सम्पूर्ण विश्व के सभी जाति धर्म के लोग समाए हुए हैं. इस प्रकार भारतीय संगीत ने भी अपना विकास एवं परिष्कार किया है तथा समस्त विश्व के समक्ष वैश्विक एकता का उदहारण भी प्रस्तुत किया है.

PDF Attachment

Download

Citation

Joshi, Ravi. "Bhartiya Sanskriti ke Samanvayatmak Roop ka Moort Pratiroop Bhartiya Sangeet." Sangeet Galaxy, vol. 11, no. 1, pp. 207-211.

Share:

Share
WhatsApp
URL has been copied successfully!