विश्व मेंप ांच मूल तत्ि - पथ्ृ िी, अवनि, ि य, ु िरुण एिां आक श हैइिके वमश्रण सेही सम्पूणण
प्रकृवत क विम णण हुआ ह, ैइसी प्रक र र गों केअसांख्य रूप भी शुद्ध र गों केवमश्रण पर आध ररत
है. मूल तत्िों क शुद्ध रूप हमेश विवमत म त्र मेंही होत हैतथ उिके विवभन्ि वमश्रणों द्व र ही
अिवगवित रूपों की प्र वि होती है. एक र ग मेंदसुरेर ग क वमश्रण होिेसेविि र गों क सिृ ि
होत है उन्हें छ य लग र गों की श्रेणी में स्थ ि वदय ि त है. इि र गों के वमश्रण की प्रविय में दो अलग-अलग
थ टों सेिन्य र गों को वमवश्रत कर एक ििीि र ग क विम णण वकय ि त हैपरन्तुदोिों र गों क वमश्रण कुछ इस
प्रक र से वकय ि त है वक वमवश्रत वकये गए र गों की के िल छ य म त्र वदख ई दे, परन्तुविर भी उि वमल येहुए
र गों सेछ य लग क स्िरुप कुछ अलग ही प्रतीत हो, इसी प्रक र सांकीणणर गों मेंशुद्ध एिां छ य लग दोिों क
वमश्रण होत हैअथ णत इसमेंदो सेअवधक र गों क वमश्रण देखिेको वमलत हैअतः इसी क रण बहुत सेविद्ब ि
वमश्र र गों क सीध सांबांध शुद्ध छ य लग एिांसांकीणणपद्धवत सेिोड़तेह.ै
कलोत्तरा, राकेश. "शुद्ध, छायालग एवं संकीर्ण पद्धति से मिश्र रागों का अंतर्संबंध." Sangeet Galaxy, vol. 13, no. 1, January 2024, pp. 195-199.