प्रस्तुत शोधपत्र मेंशोधछात्राद्वारा अवनद्ध वाद्यों केप्राचीन काल सेवततमान काल तक केववकास क्रम की ववस्ततृ
चचातकी ह।ै इस शोध मेंअवनद्ध वाद्यों केऐवतहावसक और साांस्कृवतक महत्व को वेद, पुराण, उपपुराण, और
उपवनषद जैसेप्राचीन ग्रांथों मेंववणतत सांदर्भों के माध्यम सेप्रकाश मेंलाया गया ह.ैअवनद्ध वाद्य यांत्रों का प्रयोग
अत्यांत प्राचीन काल सेही होता आ रहा ह, ैऔर इसका उल्लेख वैवदक सावहत्य में र्भी वमलता है। इस शोधपत्र के
माध्यम सेयहस्पष्टवकया गयाहैवक वैवदक युग सेलेकर वततमान युग तक अवनद्ध वाद्योंनेगायन, वादन औरनत्ृय
के साथ सांगत मेंमहत्वपूणतर्भूवमका वनर्भाई है. प्राचीन काल के प्रमुख ग्रांथों का अध्ययन करतेहुए, इनमें ववणतत
अवनद्ध वाद्यों की सांगत मेंर्भूवमकापर ववस्तार सेचचातकी गईह।ैइसकेपश्चात्, वततमान समय में अवनद्ध वाद्यों की
वववर्भन्न ववधाओांकेसाथ सांगत का ववश्लेषण करतेहुए, उनके प्रयोग और महत्व को र्भी स्पष्ट वकया गया है। इस
प्रकार, यह शोधपत्र अवनद्ध वाद्यों केऐवतहावसक ववकास और उनकी वततमान प्रासांवगकता को समझनेका एक
ववनम्र प्रयास है।
Bajpai, Akshita. "संगत वाद्य के रूप में अवनद्ध वाद्यों का महत्व (प्राचीन काल से वर्तमान काल के सन्दर्भ में) ." Sangeet Galaxy, vol. 13, no. 2, July 2024, pp. 105-110.