संगीत विषयक ग्रन्थों की श्ंखर ला मेंपं. शाङ्गगदेि द्वारा रवित ‘‘संगीत रत्नाकर’’ सिागविक िविगत एिंमहत्िपूर्गग्रन्थ
है. 13िीं शताब्दी मेंवलखा गया यह ग्रन्थ संगीत के प्रािीन परम्पराओंके प्रकाशन के साथ-साथ तत्कालीन संगीत में
हो रहेपररितगनों की प्रमावर्क सूिना भी देता है. ‘संगीत रत्नाकर’एक ऐसापूर्गग्रन्थ हैविसमेंलेखक नेसंगीत सम्बन्िी
सभी पक्षों पर सम्यक्वििार प्रस्तुत वकया ह.ैिब भारतीय संस्करवत एिंसंगीत पर विदेवशयों का आक्रमर् हो रहा था,
उस समय उत्तरी भारत के संगीत मेंतो फारसी सभ्यता और संस्करवत केकारर् नया मोड़ आया, परन्तुदवक्षर् भारत में
प्रािीन संगीत की सुरक्षा एिं संिवरि होती रही. दवक्षर् भारत में इसी समय एक प्रकाण्ड विद्वान पं. शाङ् गगदेि हुए.
रािनैवतक अस्त- व्यस्तता िैसी विषम पररवस्थवतयों मेंपं. शाङ् गगदेि नेवबखरेहुए ग्रन्थों को एकत्र वकया, उनका
अध्ययन वकया, मनन-विन्तन कर उनको एक साकार ग्रन्थ ‘‘संगीत रत्नाकर’’ का रूप दे वदया.पं. शाङ्गगदेि द्वारा रवित
ग्रन्थ ‘संगीत रत्नाकर’ भारतीय शास्त्रीय संगीत िगत काएक ऐसा ग्रन्थ है विसेवहन्दस्ुतानी संगीत तथा कनागटक संगीत,
दोनों ही पिवतयों में आिार ग्रन्थ के रूप में स्िीकार वकया गया है.
सिंह, रितु. "संगीत रत्नाकर ग्रन्थ में प्रतिपादित विषयों का सिंहावलोकन." Sangeet Galaxy, vol. 14, no. 1, 2025, pp. 341-347.