हररयाणा केलोक संगीत मेंराग आधाररत, तबले अर्थर्ा नक्कारा के बोलों से वलवपबद्ध अनेक रचनाएँ हैं जो वर्वभन्न
शैवलयों के नाम से जानी जाती हैं. इनरचनाओंको लोक संगीतज्ञोंनेवभन्न-वभन्न र्गों मेंर्गीकृत वकयाहैजैसेगीत
या लोक गीतों में जन्म के गीत, वर्र्ाह के गीत, मत्ृयुकेगीत आवद. इसी श्रंखला मेंहररयाणा केलोक संगीत के
साहित्य मेंिरियाणा की अनेकों गायन शैहियों का समावेश िैजो इस प्रान्त केसाांगीहतक व साांस्कृहतक काययक्रमों
को सुशोहित कि ििी ि.ैंिरियाणा की इन प्रमुख गायन शैहियों मेंआल्िा-उदि, बििे-तबीि नसीिा, हनिािदे,
चमौिा, सोिनी, िागनी, माण्ड, (सााँझी, िोिी, तीज, साम्मण, गूग्गा औि पवयसम्बहन्ित गीत), खाका पािणा,
शब्दवाणी हकस्से, सागां आहद सहम्महित िैंजो समय एवां हस्िहत केअनुसाि गाई बजाई जाती ि.ैंये शैहियााँ िय
स्वि ताि सेयुक्त िैंतिािरियाणा केसिी प्रहतहित िोक एवांअनुिवी किाकािोंद्वािा प्रस्तुत िी की जातीि.ैंइन
शैहियों मेंिाग एवांताि केहवहिन्न तत्वों का समावेश ि.ै
िरियाणा की इन गायन शैहियों मेंकिाकािों नेसांगीत के हवहिन्न तत्वों का प्रयोग ििीिाांहत हकया िैजैसेस्वि,
िय, ताि, गमक, मीण्ड, खटका, आिाप आहद. इन सिी गायन शैहियों जैसे आल्िा-उदि, नसीिा, कात्यक,
िागनी, चमौिा, हनिािदे, बििे-तबीि आहद मेंताि पक्ष काएक उत्तम सांयोग बनाया गयाि.ैउपिोक्त गायन शैहियों
मेंमुख्यतः ढोि, ढोिक, ढपिी, घड़ा वाघों पि कििवा, चाांचि (दीपचन्दी), रुपक आहद तािों का वादन िोता िै.
आल्िा-उदि जैसी गायन शैहियों को बीन, नफीिी, अिगोजा आहद स्वि वाद्यों पि िी साि-साि बजाया जाता िै.
उपिोक्त सिी िचनाओांमेंबैंजों एवांिािमोहनयम वाद्य की सांगत तो यिााँकी हवशेषता ि.ैअतः िरियाणा की सिी
िोक गायन शैहियााँसांगीत जगत केहिए प्राणदायक ि.ैं
राकेश. "हरियाणा लोक संगीत की प्रमुख गायन शैलियों का विश्लेषणात्मक अध्ययन." Sangeet Galaxy, vol. 14, no. 2, 2025, pp. 60-72.