Asht-chhapiya Bhakta Kavi Nand Das ka Sangitik Yogdan

Abstract

मध्यकाल में उत्तर भारत के कृष्ण-मंदिरों में भक्ति की एक विशेष परंपरा थी, जिसमें भक्तगण नित नई पद रचनाओं और स्वर-रचनाओं के माध्यम से श्रीनाथ जी की उपासना एवं सेवा करते थे। इनमें वल्लभाचार्य जी एवं उनके द्वितीय पुत्र श्री विट्ठलनाथ जी के आठ शिष्य अष्टछाप भक्त कवि के नाम से विख्यात हैं। ये आठ महानुभाव संत कवि श्रीनाथ जी की नित्य लीला में अन्तरंग सखाओं के रूप में सदैव उनके साथ रहते थे। ये संत कवि प्रतिदिन अपनी रचना बनाकर भिन्न-भिन्न राग एवं ताल के माध्यम से सुबह से शाम तक श्रीनाथजी की सेवा में प्रस्तुत किया करते थे। मंदिरों में प्रचलित संगीत की इसी परंपरा को अष्टछापीय संगीत के नाम से जाना जाता है। इन्हीं आठ भक्त कवियों में से एक थे नंददास जी। नंददास जी की रचनाओं में संगीत से संबंधित जिन पारिभाषिक शब्दों का प्रयोग हुआ है, उन शब्दों की व्याख्या करना और उन्हीं के आधार पर संगीत के क्षेत्र में नंददास जी के योगदान पर प्रकाश डालना प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य है।

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Citation

Chopada, Shraddha. "Asht-chhapiya Bhakta Kavi Nand Das ka Sangitik Yogdan." Sangeet Galaxy, vol. 10, no. 1, January 2021, pp. 54-60.

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