Begum Akhtar : Yado Ke Aaine Me

Abstract

बह ुत पहले ब ेगम अख़्तर साहिबा न े एक दादर े म ें यह ब ंद लगाकर गाया था μ शब े फिराक जो पूछी ये मै ंन े नींद से बात कि त ू भी अब नही ं आती है, मुझ गरीब क े पास तो हँस के कहन े लगी नींद मुझसे सुन कमबख्त मैं त ेर े पास रहँू या त ेर े नसीब के पास और इस तरह अपन े सोए हुए नसीब को उन्हा ेंन े अपन े मुस्तकिल इरादों और अपनी जवाहराती आवाज से जगा लिया था।

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Citation

Praveen, Yogesh. "Begum Akhtar : Yado Ke Aaine Me." Sangeet Galaxy, no. 1, October 2012, pp. 1-7.

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