भारतीय संगीत, रागदारी संगीत के नाम से भी जाना जाता है, कारण है यहां की असंख्य राग रचनाएं और उसके वैविध्यपूर्ण प्रस्तुतिकरण की शैलियाँ. भारतीय संगीत की एक और विशेष बात यह है कि भारतीय संगीत प्रणाली जहां पारंपरिक है, नियमों और बंधनों दृढ़ कही जाने वाली है, तो वहीं यह पद्धति कलाकारों को स्वच्छंदता प्रदान कर उन्हें स्वयं की उपज एवं मनोधर्म का पालन करने की आज़ादी भी प्रदान करती है. नव राग निर्मिति भी इसी उपज और मनोधर्म को प्रदर्शित करने का एक माध्यम है.
यूं तो भारतीय संगीत पद्धति में रागों की संख्या अपरिमित है तथापि संगीतकारों को नए राग की परिकल्पना गढ़ते प्रायः देखा गया है. नवीन राग निर्माताओं की इस लड़ी में भारतीय संगीत के कई दिग्गज कलाकारों और मनीषियों का नाम जुड़ता चला जा रहा है. गायक हों या वादक, सभी नव राग निर्मिति के माध्यम से अपनी कल्पनाशक्ति की अनूठी झलक जन मानस के समक्ष प्रस्तुत करने में सफल रहे है. इस श्रंखला में गायकों में पं. कुमार गंधर्व, पं. भीमसेन जोशी, पं. श्रीकृष्णनारायण रातनजनकर तथा गायको में उ. अलाउद्दीन खां, पं. पन्नालाल घोष, तथा उ. अमजद अली खां आदि नाम उल्लेखनीय हैं. विश्व संगीतकार के रूप में प्रसिद्ध, सितार के पर्याय पं. रविशंकर जी भी इस श्रंखला के एक अभिन्न अंग हैं. सर्वविदित है कि संगीत जगत के प्रत्येक परिशिष्ट में उनके योगदान की सुगन्ध है, अतः नवीन राग निर्माण में भी आपने अप्रतिम योगदान से भारतीय राग परंपरा को समृद्ध किया है.
अतः प्रस्तुत शोध प्रपत्र में पंडित रविशंकर जी द्वारा रचित कतिपय नवीन रागों का विवरण प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है.
Dwivedi, Pragati and Neetu Gupta. "Bharat Ratna Pandit Ravi Shankar Ji Dwara Rachit Nav-Nirmit Raagon ki Vivechna." Sangeet Galaxy, vol. 10, no. 1, January 2021, pp. 46-53.