अधिकतर संगीत-प्रेमियों की मानसिकता होेती है, कि वे अपने संगीत को ही सर्वश्रेष्ठ मानते हैं। उसी को सुनते और आनन्दित होते हैं। अन्य संगीत को सुनना ही नहीं चाहते। प्रायः देखा गया है कि जब भी आकाशवाणी या दूरदर्शन से अन्य प्रदेश के संगीत का प्रसारण प्रारम्भ होता है, तो वे अपना सेट तुरन्त बन्द कर देते हैं। उनका तर्क होता है कि वह संगीत उनकी समझ में तो आएगा ही नहीं, फिर क्यों समय नष्ट किया जाय। उनमें इतना भी धैर्य या उत्सुकता नहीं होती कि देखें कि वे क्या गाते-बजाते हैं। ऐसी संकीर्ण मानसिकता क्यों ? फिर भी उनकी इच्छा होती है कि उनके संगीत को सभी सुनें और सराहें।
Ch, Acharya Girish and ra Srivastav. "Deshi Sangeet Aur Videshi Shrota." Sangeet Galaxy, January 2015, pp. 58-62.