Devdasi Pratha : Kal Aaj Aur Kal

Abstract

15 अगस्त 2010, स्वतन्त्रता दिवस के अवसर पर महाराष्ट्र की देवदासियों ने मुम्बई में सार्वजनिक रूप से अपना अर्र्द्धनग्न प्रदर्शन किया, तो पूरी दुनिया का ध्यान मीडिया के माध्यम से इस ओर आकृष्ट था। इस घटना के पीछे कारण यह था कि सदियों से चली आ रही देवदासी प्रथा पर रोक लगा दिए जाने के बाद देवदासियां निराश्रित हो गई। सामाजिक अस्वीकृति व समाज में सम्मानजनक स्थान न मिल पाने के कारण अधिकांश देवदासियां वेश्यावृति के पेशे में आ गई। वर्ष 2007 में सुप्रीम कोर्ट को एक पत्र मिला जिसमे निराश्रित देवदासियों के बच्चो की दुर्दशा को बयान किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इसे जनहित याचिका मानकर इस पर कार्यवाही की। सुप्रीम कोर्ट ने इन बच्चो की स्थिति का संज्ञान लिया और आंध्र प्रदेश सरकार से पूछा कि उसने इन बच्चों के कल्याण के लिए क्या किया। मानवाधिकार आयोग के वर्ष 2004 की एक रिपोर्ट में इन देवदासियों के बारे में बताया गया है कि देवदासी प्रथा के रोक के बाद वे नज़दीक के इलाकों व शहरों में चलीं गई, जहाँ वे वेश्यावृत्ति के धंधे में लग गई। वर्ष 1990 की अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक 45ण्9ः देवदासियां एक जिले में वेश्यावृत्ति करती है तथा शेष अन्य रोज़गारों जैसे खेती-बाड़ी या उद्योगो में लग गई।

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Citation

Verma, Amit Kumar. "Devdasi Pratha : Kal Aaj Aur Kal." Sangeet Galaxy, no. 1, October 2012, pp. 1-4.

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