Editorial

Abstract

नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ जनवरी 2015 का अंक आपके सम्मुख प्रस्तुत है। एक संगीतकार को अपने साज से कितनी मुहब्बत होती है, ये बात किसी से छुपी नहीं है। उसका साज उसकी जिंदगी की बेशकीमती दौलत होती है, जिससे जुदा होकर वो रह नहीं सकता। हाल ही में न्यूज चैनलों पर अचानक एक दिन खबर आई कि भारतरत्न बिस्मिल्लाह खान की शहनाई चोरी हो गई। इस खबर से उनके चाहने वालों और उनके संगीत प्रेमियों को धक्का सा लगा। बिस्मिल्लाह खान साहब अपनी शहनाई से बेइन्तिहा मुहब्बत करते थे। अपनी पत्नी के इन्तकाल के बाद से ही अपनी शहनाई को बिस्तर पर रखते थे और उसे ही अपनी पत्नी मानते थे। कहते थे कि इससे उन्हें अपने संगीत के बारे में कुछ नया सोचने और नया करने का जज्बा मिलता है। अपनी जिंदगी के आखिरी पड़ाव पर जब वह अस्पताल में भर्ती थे तो किसी ने उनसे उनका हाल-चाल पूछा और बातों ही बातों में उनकी बेगम (शहनाई) के बारे में भी पूछा। तो बिस्मिल्लाह खान साहब संजीदे होकर बोलें-‘‘वह घर पर हैं, मैं बीमार हँू इसलिए वह घर संभाल रही है।’’

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Editor-in-Chief. "Editorial." Sangeet Galaxy, January 2015, pp. 1-1.

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