पिछले दिनों दो अच्छी खबरे सुनने को मिलीं। दोनों खबरे उत्तर प्रदेश से थी। एक बेगम अख्तर अवार्ड की घोषणा और दूसरी लखनऊ स्थित कालका बिन्दादीन महाराज की ड्योढी़ का पुनरूद्धार।
मल्लिका-ए-गजल बेगम अख्तर ने ठुमरी, दादरा और गजल को जिस रंग में और जिस अदा से पेश किया दुनिया उनकी दीवानी हो गई। जहाँ तक गजल की पंखुड़ियां ख®लने की बात है उसके हर नाजुक अंग को आवाज का सही रंग देना उनकी अपनी ईजाद थी।
Editor-in-Chief. "Editorial." Sangeet Galaxy, July 2015, pp. 1-1.