’नादाधीनं जगत्’ अर्थात् सम्पूर्ण जगत् नाद अथवा ध्वनि के अधीन है। गागर में सागर समेटे हुए इस सूत्र में इतना विस्तार है कि इसकी व्याख्या में विज्ञान जगत् के ध्वनि से जुड़े गहन रहस्य, धर्म और ध्यान से जुड़ी विधियां और कला-संगीत जगत् के जाने कितने गूढ़ पहलू उजागर हो जाते है।