ग़ज़ल एक ऐसी प्रेम और आनंद की बेल है, जो बंजर भूमि में भी उगकर वहाँ हरीतिमा की सृष्टि करने का सामर्थ्य रखती है। ग़ज़ल ने देशकाल एवं मानवीय विचार-धाराओं में आए हुए परिवर्तन को स्वीकार करते हुए अपनी विकास-यात्रा पूरी की है। यही कारण है कि कविता में रूचि ना रखने वाले व्यक्ति भी ग़ज़ल के शेर से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकते। ग़ज़ल ने हमारे हृदय में आत्मसम्मान, प्रेम, दया, विनम्रता, भलाई, हमदर्दी तथा अनेकानेक मानवीय भावनाओं को उद्वेलित किया है। ग़ज़ल का एक-एक शेर हृदय में गहराई से उतरने का सामर्थ्य रखता है। “ग़ज़ल हकीक़त में जज़्बात का मुरक्क़ा ( संग्रह) है। उसका हर शेर किसी इन्सानी जज़्बे की तस्वीर है और इन्सान के जज़्बात अपनी नैरंगियों (जुनून) में शुमार की हद में निकल जाते हैं।“
Shukla, Smriti. "Gazal Prakriti Aur Uska Parivartit Roop." Sangeet Galaxy, July 2019, pp. 31-36.