Gwalior Sangeet Sanskriti ka Bhartiya Sangeet Sanskriti par Prabhav

Abstract

ग्वालियर में तोमरों का राज्य अवश्य समाप्त हुआ, पर ंत ु उनका संगीत राष्ट ं व्यापी हो गया। तोमर वीणा छिन्न-भिन्न हो गई, पर ंत ु उसकी स्वर लहरी हिन्द ु-मुसलमान, सूफी-संत सबके मर्म को स्पर्श करती रही। संगीत क े क्षेत्र में न काफिर रहा, न मलेक्ष, सब घुल मिलकर भारतीय संगीत क े पोषक हो गए, ग्वालियर ध्रुवपद की गायकी उत्तर-दक्षिण सभी हिन्द ू मुस्लिम दरबारों में फैल गयी। संगीत आ ैर भाषा के क्षेत्र में हिन्द ू-मुस्लिम संस्कृति का समन्वय प्रारम्भ हुआ। बैज ू, बख्श ु, कर्ण, स्वामी हरिदास, महम ूद लोहंग की सरस्वती हिंद ू, त ुर्क, मुग्ल सबकी सामान रूप से प ूज्यनीय बन गयी।

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Citation

Mittal, Dipak Kumar and P.L.Gohadkar. "Gwalior Sangeet Sanskriti ka Bhartiya Sangeet Sanskriti par Prabhav." Sangeet Galaxy, July 2014, pp. 57-62.

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