हिंदी फ़िल्म संगीत में सितार वाद्य का अपना महत्वपूर्ण योगदान रहा है. संगीत विधा में वाद्यों की भूमिका अन्यतम है. फ़िल्म संगीत जगत में नए-नए वाद्यों का प्रयोग होता आया है. वर्तमान समय में तंत्री वाद्यों के अत्याधुनिकीकरण का सबसे बड़ा उदाहरण सितार वाद्य है जो भारतीय शास्त्रीय संगीत में तंत्री वाद्यों में अग्रगण्य तो है ही साथ ही साथ फ़िल्म जगत में भी इसकी मुख्य भूमिका रही हैं. वाद्य संगीत में स्वर तथा लय का स्वच्छंद तथा प्रभावपूर्ण प्रयोग देखा जाता है. कुछ विशेषज्ञों के अनुसार वाद्य-कला, गायन तथा नृत्य की अपेक्षा अधिक सूक्ष्म एवम् अकृत्रिम आनन्द प्रदान करने वाली होती है. फिल्म संगीत के आने से पहले संगीत एवं वाद्य वादन शाही महफिलो व धनवानों की हवेलियों तक सीमित था तथा साधारण व्यक्ति की पहुँच वहाँ तक नहीं थी. फिल्म संगीत ने इस समस्या का समाधान किया. इस कार्य को करने में जिन महान संगीतकारों का योगदान रहा है, उनमें - रोशन, एस.डी. बर्मन, मदनमोहन, सी. रामचन्द्र, बसंत देसाई, शंकर-जयकिशन इत्यादि विशेष रूप से उल्लेखनीय है. इस शोध पत्र में हिंदी फ़िल्म संगीत के अंतर्गत सितार वाद्य के प्रयोग का सूक्ष्म विश्लेषण किया गया हैं. फ़िल्म के अंतर्गत आने वाले अनेक गीतों में सितार की भूमिका को दर्शाने का प्रयास किया गया हैं. इस शोध में वर्णन किये गए फ़िल्म एवं उनके गीत प्राथमिक स्त्रोत के रूप में संकलित किये गए हैं. प्रस्तुत प्रपत्र में श्रव्य विधि द्वारा तथ्य संकलित किये गए है. इस शोध-पत्र में मुख्य रूप से सितार का हिंदी फ़िल्मी गीतों में प्रयोग एवं उसकी भूमिका पर चर्चा की जायेगी.
Yadav, Amit. "(Hindi Film Sangeet me Sitar Vadya ki Bhoomika) हिंदी फ़िल्म संगीत में सितार वाद्य की भूमिका." Sangeet Galaxy, vol. 12, no. 2, July 2023, pp. 119-125.