संगीत को अब तक उस कला के रूप में देखा जाता रहा है, जिससे मनोरंजन होता है और मन को स्फूर्ति मिलती है पर अब विज्ञान धीरे-धीरे इस विश्वास पर उतर रहा है कि संगीत एक बड़ा महत्वपूर्ण शक्ति-केन्द्र है। यदि उस शक्ति का यथेष्ट अनुसंधान एवं उपयोग किया जा सका तो अनेक आश्चर्यजनक रहस्य सामने आयेंगे और उनका मानव-जाति के कल्याण में भारी उपयोग किया जा सकेगा।
आज का संगीत एक प्रकार का सम्मोहन है जिससे मनुष्य असंयम की ओर दिग्भ्रान्त हो रहा है, परन्तु प्राचीनकाल में हमारे पुरखों ने तत्त्वान्वेषण के आधार पर उसकी प्रबल शक्ति और सामर्थ्य को परखने के साथ यह भी जाना था कि संगीत शक्ति के दुरुपयोग से मानव-जाति का अहित भी हो सकता है, इसलिये उसे भी धर्म का एक अंग माना और ऐसे प्रतिबन्ध लगाये जिससे स्वर साधना का निष्कलंक रूप बना रहे और उससे मानव-जाति की भलाई होती रहे ।
Shukla, Gourav. "Jeevan Shakti ka Sakaratmak Shrot – Sangeet." Sangeet Galaxy, no. 1, January 2020, pp. 2-5.