Khyaal Gayaki – Bhendi Bazar Gharane ke Sandarbh me

Abstract

समय के साथ परिवर्तन को सहृदयता से अपनाना अवश्य ही निरन्तरता, गतिशीलता और सृजनात्मकता का सूचक है, परन्तु साथ ही स्वयं की मौलिकता का संरक्षण भी स्वास्तित्व के नव सर्जन का आग्रह ही तो है। प्रस्तुत विचार भारतीय संस्कृति की अक्ष्क्षुण धरोहर भारतीय शास्त्रीय संगीत पर प्रकाश डालते हैं। यहाँ भारतीय शास्त्रीय संगीत की उसके प्रादुर्भाव के प्राचीनतम काल से अब तक की बदलती देश, काल, परिस्थितियों में हुए विकास व बदलते स्वरूप की संक्षिप्त चर्चा की गई है। मूल रूप से शोध पत्र भारतीय शास्त्रीय संगीत में ख़्याल गायकी के विभिन्न घरानों में विस्मृत कर दिए गए ‘भेंडी बाज़ार घराना‘ की दुर्लभ गायन शैली की विशेषताओं को वर्णित करता है। भेंडी बाज़ार घराना गायन शैली वैविध्यपूर्ण, अखण्डत्व व कलात्मक वैशिष्ट्य के विलक्षण तत्वों से सजी संवरी अपार समृद्ध व अनूठी गायकी है, तथापि नवीनीकरण व संचार माध्यमों के इस दौर में भी यह घराना कुछ कारणों से दुर्लभ व विस्मृत गायकी की श्रेणी में आ गया जो कि घराने के शुभचिंतक कलाकारों के अथक प्रयासों से पुनर्जीवित व सक्रिय हो सका है। वर्तमान में डेढ़ शताब्दी पूर्व स्थापित इस घराने की परम्परा में देश के विभिन्न स्थानों में सक्रिय शिष्यों/कलाकारों से मिलकर बनता है ‘भेंडी बाज़ार परिवार‘।

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Citation

Diwedi, Bhoomika. "Khyaal Gayaki – Bhendi Bazar Gharane ke Sandarbh me." Sangeet Galaxy, January 2015, pp. 50-57.

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