Kumayun Ke Manglik Geet

Abstract

संगीत से सम्पूर्ण विश्व का जड़ एवं चेतन पदार्थ आच्छादित है साहित्य व संगीत किसी भी देश, राज्य, अंचल के निवासियों के विचार तथा जीवन का दर्पण होता है, जिसमें वहाँ के निवासियों की जीवन शैली व सांस्कृतिक परम्पराएं स्पष्ट रूप से अभिव्यक्ति को प्राप्त होती हैं। लोक का अपना संसार होता है, जो अपनी परम्पराओं और संस्कारों में विश्वास करता है। श्रुतियों द्वारा एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक संस्कारों की रेखाएं खिंचती चली जाती है। यदि विचार करें तो हम पाते हैं कि यही रेखाएं हमें अनुशासन में बांधती हैं और सीधा-सरल जीवन जीने की कला सिखलाती हैं। इसके पीछे गीत-संगीत का विज्ञान जुड़ा है। भारतवर्ष के लोक जीवन में गीत-संगीत की ऐसी विविध झांकियांें के दर्शन होते हैं। लोक की इन परम्पराओं को गीत रूप में एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहँुचाना आसान है। उत्तराखण्ड के कुमाऊँ मण्डल में भी गीतों की ऐसी परम्पराएं हैं जो इस समाज को हर अवसर पर जोड़ती हैं।

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Citation

Upreti, Pankaj. "Kumayun Ke Manglik Geet." Sangeet Galaxy, January 2015, pp. 34-41.

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