किसी ने कहा है कि कलाकार और संघर्ष का चोली दामन का साथ है। यह बात पूरी तरह से चरितार्थ होती है स्वर सम्राज्ञी लता मंगेशकर के जीवन पर। जो भारतीय समाज में विशेषकर स्त्री समाज की अस्मिता को बनाये रखने में एक आदर्श है और उन तमाम गायिकाओं, कलाकारों के लिए प्रेरणा भी जो गुमनामी के अंधेरे में गायब रही। जिनको उनके क्षेत्र में अवसर नहीं मिला, जिनकी वह हकदार रही। समाज में स्त्रियों के व्यक्तित्व की स्वतंत्रता को स्वीकार न करने वाली मानसिकता के विरूद्ध जाना बहुत ही साहस का कार्य होता हैं। जिसका सामना कर लता ने सिद्ध किया कि वह एक योग्य और साहसी (बेटी) स्त्री है। पिता की मृत्यु के उपरान्त लगभग तेरह वर्ष की अल्प आयु में परिवार की जिम्मेंदारियों का निर्वहन आसान काम नहीं था। अपनी माँ, तीन बहनों और एक भाई को सम्भालना सचमुच लता जैसी साहसी, स्वाभिमानी बेटी ही कर सकती थी। एक बेटी (लता मंगेशकर) ने जो एक अद्वितीय संघर्ष कर, आदर्श को स्थापित किया वह आज ‘बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओं‘ के रूप में चरितार्थ हो रहा हैं। साथ ही संदेश भी देता है बेटी को गर्भ में मारने वाले और बेटी को बोझ समझने वाले लोगों के लिए भी। इस अध्ययन की सहायता से उनके जीवन संघर्ष, व्यक्तित्व, अभिनय, गायन आदि का गहराई से मूल्यांकन और विश्लेषण किया गया है, जिससे समाज में विशेषकर स्त्रियों में आये बदलाव व मूल्यों को रेखांकित किया जा सकें।
Prakash, Ved. "Lata Mangeshkar ka Jeevan Sangharsh, Vyaktitva : Ek Sankshipt Addhyayan." Sangeet Galaxy, January 2018, pp. 81-87.