ब्रज के विभिन्न सम्प्रदायों में प्राचीनतम माने जाने वाले निम्बार्क सम्प्रदाय में भी समाज गायन की परम्पराये हैं। निम्बार्क सम्प्रदाय के आदि आचार्य एवं प्रतिष्ठाता श्री निम्बार्काचार्य माने जाते है। इस सम्प्रदाय की कीर्तन व्यवस्था भी समाज गान से अभिहित की जाती है।
महावाणी में कहा गया है:-
मोहन मंदिन चौक में, मिलि सब सखी समाज।
बीन बजावहिं, गावहिं, मधुर-मधुर सुर साज।।1
बजत बधाई महल मंे आई सखी समाज।2
मंगल साज समाज सौं गावत मंगल गीत’’3
’’सुनियो रे आज नचावै नन्द को हिलि मिलि सकलसमाज’’4
Gupta, Preeti. "Nimbark Sampraday ki Sangeet Gayan Parampara." Sangeet Galaxy, January 2014, pp. 12-17.