भारतीय शास्त्रीय संगीत में घराना पद्धति एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जो भारतीय शास्त्रीय संगीत को संरक्षित रखने और बढ़ावा देने में मदद करती है. भारतीय संगीत में गायन के घरानों में ग्वालियर घराना अपना महत्वपूर्ण स्थान रखता है. इसे 'घरानों की गंगोत्री' कहा जाता है. ग्वालियर घराने की पौराणिक भूमि पर सदैव ही नादध्वनि गूंजती रही है. सभी घरानों में ग्वालियर घराना ख़्याल गायन के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया. इस घराने के अद्वितीय संगीताचार्यों ने अपनी अनोखी प्रतिभा से संगीत को सुरक्षित एवं जीवित रखा तथा समृद्ध बनाया. ग्वालियर घराने के अद्वितीय संगीताचार्यो में पं० नारायण राव व्यास एक स्तम्भ के रूप में प्रतिष्ठित है जो कि बहुत ही सुप्रसिद्ध गायक एवं ख्याल गायकी के प्रणेता माने गए. प्रस्तुत शोध पत्र ग्वालियर घराने के पण्डित नारायण राव व्यास जी के जीवन, व्यक्तित्व एवम् कृतित्व का विश्लेषण करता है और उनके द्वारा की गई रिकॉर्डिग की संख्या से यह ज्ञात होता है कि वे आरपीएम युग के सबसे लोकप्रिय कलाकार रहें हैं. इस शोध पत्र में यह बताने का पूर्णतः प्रयास किया जाएगा कि उनका सांगीतिक जीवन, कार्य, एवम् 78RPM रिकॉर्डिगस में किस प्रकार योगदान रहा है और वह किस तरह 78RPM युग के सर्वाधिक प्रसिद्ध कलाकार रहे.
Komal. "(Pandit Narayan Rao Vyas: 78 RPM Yug ke Sarvadhik Prasiddha Kalakar) पंडित नारायण राव व्यास : 78 RPM युग के सर्वाधिक प्रसिद्ध कलाकार." Sangeet Galaxy, vol. 12, no. 2, July 2023, pp. 126-134.