Radheshyam Tarj ka Sangeet Abhi bhi hai Pahadon me

Abstract

संगीत सागर में गायन-वादन की अपार विधाए है । छन्द, रस, काल, ताल अनेकानेक प्रकार से इन्हें तराशा जाता रहा है। इन्हीं में से एक विधा राधेश्याम भी है । दरअसल ‘राधेश्याम’के नाम पर यह छन्द कभी बेहद लोकप्रिय रहे हैं । राधेश्याम तर्ज का संगीत रस अभी भी पहाड़ में है। नेपाल की श्री सरकार से ‘कथावाचस्पति’ की पदवी प्राप्त कीर्तनकलानिधि, काव्यकलाभूषण, श्री हरि-कथा-विशारद, कविरत्न राधेश्याम जी की ‘राधेश्याम रामायण’ का प्रयोग उत्तराखण्ड की रामलीला में होता है।1 इसके अलावा भी यह शैली नाट्य प्रदर्शनों में सुनाई देती है ।

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Citation

Upreti, Pankaj. "Radheshyam Tarj ka Sangeet Abhi bhi hai Pahadon me." Sangeet Galaxy, no. 1, January 2020, pp. 46-50.

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