ललित कलाओं में संगीत कला सर्वोत्तम है क्योंकि यह स्वर और लय्ा जैसे सूक्ष्म तत्वों पर आधारित है। सूक्ष्म तत्वों से प्राप्त आनन्द व्यक्ति को चारित्रिक उत्थान प्रदान करता है। अतः सूक्ष्म तत्वों पर आधारित कला भी उदात्त ही होगी। जब किसी विषय पर चिन्तन होता है तो उसके रहस्य उजागर होते हैं। इन रहस्यों को जानने की जिज्ञासा व्यक्ति के मन में प्रकट होती है और यही जिज्ञासा व्यक्ति को ज्ञान और प्रगति के नये कीर्तिमानों का स्पर्श कराती है। यदि ऐसी सांगीतिक जिज्ञासाओं का साथ ही साथ समाधान भी होता चले तो अनेक रहस्यों से पर्दा उठ जाता है जिनकी अनुभूतियाँ तो होती है, परन्तु अभिव्यक्ति के लिये शब्द नहीं मिलते हैं। इन्हीं सांगीतिक जिज्ञासाओं का समाधान करने हेतु डॉ0 तेज सिंह टाक जी ने अपनी पुस्तक ‘‘संगीत: जिज्ञासा और समाधान’’ में एक प्रयास किया है।
Shukla, Alok. "Sangeet : Jigyasa Aur Samadhan." Sangeet Galaxy, January 2014, pp. 31-32.