प्रस्तुत विषय ’संगीत कला के पुनरुत्थान की प्रासंगिकता‘ के अन्तर्गत यह दर्शाने का प्रयत्न किया गया है, कि विभिन्न कालावधियों में होने वाले परिवर्तनों के प्रभाव स्वरूप भारतीय संगीत कला उत्थान-पतन को प्राप्त करती हुई विकास मार्ग पर निरन्तर आगे बढ़ती रही। क्या समय परिवर्तन इसका प्रमुख कारण रहा या अन्य कारणोंवश कभी तो यह कला सर्वोत्कृष्ट रूप में रही, तो कभी इसकी दशा शोचनीय हो चली। प्राचीन काल में संगीत कला का मूल स्वरूप क्या था तथा अपनी विकास-यात्रा में विभिन्न परिवर्तनों व स्वरूपों को आत्मसात करती हुई, उत्थान-पतन की प्रक्रिया से गुजर कर अपनी सुदृढ़ स्थिति तक पहुँच सकी अर्थात् किस प्रकार संगीत कला का पुनरुत्थान होना संभव हो पाया तथा पुनरुत्थान के पश्चात् वर्तमान में इस कला की क्या स्थिति है और भविष्य में यह कला किस दिशा में जा रही है, इस विषय पर चर्चा प्रस्तुत शोध-पत्र में की गई है। इसके अतिरिक्त वर्तमान में संगीत कला का उचित रूप से संरक्षण तथा प्रचार-प्रसार किस प्रकार किया जाय जिससे इसके मौलिक रूप को हानि भी न पहुँच पाये तथा इसका ज्ञान संगीत विद्यार्थियों के लिए उपयोगी सिद्ध हो सके।
Sharma, Juhi. "Sangeet Kala ka Vikas Kram : Ek Sankshipt Addhyayan." Sangeet Galaxy, July 2018, pp. 28-32.