Sangeet mein Varn ki Avdharna

Abstract

विश्व संगीत पटल पर भारतीय संगीत अपनी विलक्षण राग गायन परम्परा के लिये विशेष रूप से जाना जाता है । राग रंजित ध्वनियों का समूह है, जो विशेष विधि से संयोजित स्वर और वर्णों से बनता है । स्वरों की गतिशीलता से वर्ण बनते हैं और विशेष वर्णों से बनने वाली विविध भंगिमाओं से प्रत्येक राग का अपना स्वरूप व्यक्त होता है । आजकल वर्णों को मात्र स्वरों की गतिशीलता के रूप मे देखा जाता है । वर्णों के भेद या उसकी इकाई निर्धारित करने के लिये कोई आधार नहीं है । इस विषय में कोई प्रश्न भी उपस्थित नहीं किया जाता । संगीत शास्त्र के प्राचीन ग्रंथों में मिलने वाले संकेतों के आधार पर वर्णों के विभाजन का आधार पद को माना जा सकता है। गेय रचनाओं में इसी आधार पर चार प्रकार के वर्णों को समझने की चेष्टा की जा सकती है । इस प्रकार राग की क्रियात्मक इकाई वर्ण के स्वरूप और इसके विभिन्न भेदों के विषय में उदाहरणपूर्वक तार्किक दृष्टि से विचार करना प्रस्तुत शोध पत्र का उद्देश्य है ।

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Citation

Chopada, Shraddha. "Sangeet mein Varn ki Avdharna." Sangeet Galaxy, vol. 10, no. 2, July 2021, pp. 3-8.

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