Tabla Vadan me Garit ke Maddhyam se Soundarya Sristi

Abstract

तबला वादन क® प्रभावशाली व आकर्षक बनाने में गणित का महत्वपूर्ण स्थान है। एक तबला वादक का सम्पूर्ण वादन संबन्धी क्रिया-कलाप लय व ताल के बंधन से आबद्ध रहता है। ग़ौरतलब है कि संगीत में गणित का प्रवेश लय की स्थापना के साथ ही प्रारम्भ हो जाता है। डॉ0 सुभद्रा चौधरी के अन ुसार- ‘‘एक क्रिया और दूसरी क्रिया के बीच का काल जो पहली कि ्रया का विस्तार है, वही लय है।’’ अर्थात लय की स्थापना में दो क्रियाओं क े मध्य क े कालखण्ड को नापते है और नापना विशुद्ध गणितीय प्रकि ्रया है। स्पष्ट है कि लय अभिव्यक्ति क े लिए गणित की सहायता लेती है। संगीत के दो सूक्ष्म आधार है- स्वर और लय। लय स्वर से भी अधिक सूक्ष्म है, क्योंकि स्वर को अपन े प्रभाव के लिए लय की आवश्यकता होती है, ठीक उसी प्रकार जैसे खुशबू को हवा की।

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Citation

Verma, Amit Kumar. "Tabla Vadan me Garit ke Maddhyam se Soundarya Sristi." Sangeet Galaxy, July 2013, pp. 24-26.

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