गिरीश चंद्र श्रीवास्तव संगीत जगत में एक जाना माना नाम है। तबला विषय के विकास व प्रचार-प्रसार के लिए आपने आजीवन अथक परिश्रम किया। तालमणि, संगीताचार्य, प्रयाग श्री, स्वर साधना रत्न, नाद साधक आदि सम्मानों से नवाजे गए गिरीश जी ने देश के अनेक बड़े नगरांे के अतिरिक्त, इंग्लैण्ड, हालैण्ड, जर्मनी, बेल्जियम आदि देशों की सांगीतिक यात्राएं भी की है। साथ ही तबला वादन, तबला प्रवेशिका, ताल प्रभाकर, प्रश्नोत्तरी, ताल परिचय भाग- 1,2,3 एवं तालकोश जैसी पुस्तकों के लेखन से तबला विषय को समृद्ध किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के संगीत विभाग से अवकाश प्राप्त गिरीश जी के चिंतनपूर्ण लेख संगीत पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते है।
तबला विषय की वर्तमान स्थिति व उसकी संस्थागत शिक्षा को वे किस नजरिये से देखते है, इस संबंध में उनसे लिए साक्षात्कार के मुख्य अंश प्रस्तुत है
Verma, Amit Kumar. "Tabla Vishay ko bhi ek Bhatkhande Jaise Uddharak ki Aavashyakta Hai." Sangeet Galaxy, July 2015, pp. 46-49.