ठाकुर सुखवासी चन्द्र मास्टर उर्फ बुलांक राम भारतीय शास्त्रीय संगीत के उन प्रचारकों में से रहे हैं, जिन्होंने जीवन की कठोर यातनाओं को रोमांच बनाकर जी लिया और संगीत सेवा में समर्पित होकर अलविदा हुए। सुखवासी का जन्म 1900 में फर्रुखाबाद (उ0प्र0) में हुआ तथा महान संगीतज्ञ पं0ओमकारनाथ ठाकुर इनके गुरु रहे हैं।1 शुक्रवार 11 मार्च 1972 को दिन में 11 बजकर 30 मिनट पर पिथौरागढ़ में बुलांकी का निधन हो गया। अपने होश संभालने से लेकर अपनी जीवन यात्रा को रोचक बनाकर जीने वाले सुखवासी चन्द्र उर्फ बुलांकी राम के बारे में जो जानकारी मिलती है उसके अनुसार- चेचक की भयानक बीमारी फैलने से उनके माता-पिता का निधन हो गया। देहरादून में इनके चाचा की तम्बाकू की दुकान थी, बालक सुखबासी अपने नशेड़ी चाचा के साथ तीन-चार साल रहे। इसके बाद एक हलवाई बालक की हालत देखकर उसे अपने साथ ले गया और बारह साल तक यह हलवाई के पास रहे। इसी बीच एक साधु सुखवासी को अपने साथ ले गया और संगीत की शिक्षा देने लगा। बाद में उन्होंने विलक्षण प्रतिभा के इस बालक को संगीतज्ञ पं.ओमकारनाथ ठाकुर के साथ भेज दिया। पंडित जी की देखरेख में उन्होंने संगीत के गुर सीखे।
Utreti, Pankaj. "Thakur Sukhvasi Chandra urf Bulankiram Aur Seemant ka Shastriya Sangeet." Sangeet Galaxy, July 2015, pp. 42-45.