व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास में संगीत शिक्षा का बड़ा महत्वपूर्ण योगदान होता है। संगीत कला शिक्षा से व्यक्ति की कलात्मकता जाँची जा सकती है। उसे विकसित किया जा सकता है। संगीत कला शिक्षा को समाज में बनाए रखना आवश्यक है। शिक्षा के क्षेत्र में आधुनिकता और परिवर्तन मूलमंत्र होना चाहिए। आधुनिकता समय का प्रतिनिधित्व करती है और परिवर्तन जीवन के प्रवाह का। संगीत के क्रियात्मक एवं शास्त्र के क्षेत्र में समय-समय पर बदलाव होते रहे हैं। ये बदलाव ही विकास के द्योतक रहे हैं।
संगीत के उच्च शिक्षा के क्षेत्र में पाठ्यक्रम की एक महत्वपूर्ण भूमिका है। पठनीय सामग्री का सुव्यस्थित रूप ‘‘पाठ्यक्रम’’ कहलाता है। पाठ्यक्रम के अन्तर्गत वे सभी अनुभव आते हैं जिन्हें छात्र कक्षा के भीतर तथा कक्षा के बाहर प्राप्त करता है। इस प्रकार शिक्षा के उद्देश्यों तथा लक्ष्यों की पूर्ति में पाठ्यक्रम की भूमिका बड़ी महत्वपूर्ण है।
Mukherjee, Ankita. "Uchha Istariya Sangeet Sikshad Sansthano ke Pathyakram me Parivartan ki Aavasyakta." Sangeet Galaxy, July 2013, pp. 21-23.