मानव सभ्यता के साथ संगीत भी चला आ रहा है। अपनी अभिव्यक्तियों को व्यक्त करने के लिये लोकजीवन में पहले पहल कुछ इशारे, कुछ स्वरों से इसकी शुरुआत रही होगी। जो धीरे-धीरे विकसित होते हुए धुनों में बनती चली गई। धुनों के लिये सबसे प्रथम यंत्र तो गात्रवीणा यानि की कंठ ही है। अपने कंठ से तरह - तरह की आवाजें निकालते हुए जब कोई धुन हमें प्रिय लगती है तो उसे हम बार-बार दुहराते हैं। संगीत की इस भाषा के साथ-साथ वाद्ययन्त्र विकसित होते गये।
Upreti, Pankaj. "Uttrakhand ka Vivaee Vadya Yantra." Sangeet Galaxy, July 2019, pp. 11-13.