“गायन, वादन तथा नृत्यं त्रयं संगीत मुच्यते“ यह तो सर्वविदित है कि संगीत गायन, वादन तथा नृत्य से बनता है किन्तु जब बात शाश्वत् संगीत की है तो शाश्वत् तत्वों से युक्त संगीत को ही व्यक्त करना पडे़गा। शाश्वत् का अर्थ है निरन्तर रहने वाला। इस सृष्टि का आधार तत्व नाद है, जो आदि से अन्त तक स्थिर है। शब्द, काल, वाक् इन तीनों विशेषणों को नाद अपने में समाहित रखता है। नाद का वाचिक तत्व वाक् है।े प्रकृति अपनी गति से चलायमान है जो सांगीतिक भाषा में लय से उद्भासित है। लय का गुण भी शाश्वत् तत्व का प्रमाण है। अतः स्वर एवं लय सांगीतिक चिंतन के प्रामाणिक गुण हैं जो आध्यात्मिक दृष्टि से भी उपयुक्त एवं साध्य हैं ।
Tripathi, Deepak. "Shaswat Sangeet Ka Prateek Hai Vadya Sangeet." Sangeet Galaxy, April 2013, pp. 1-3.