उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति में गढवाल के अन्तर्गत गाये जाने वाले जागर गीतों के अर्थ पर प्रकाश डालते हुए इसके विविध प्रकारों, इसकी पूर्ण प्रक्रिया का वर्णन करते हुए विशिष्ट रुप से इसके महत्व को यह शोध पत्र उल्लेखित करता है. जागर गीत उत्तराखण्ड के गढवाल तथा कुमाऊँ दोनों ही क्षेत्रों में गाये जाते हैं और इनका इतिहास काफी पुराना है. यहां के लोग स्थानीय देवी-देवताओं को प्रसन्न करने के लिए व अपने दुखों के निवारण के लिए समय-समय पर अपने देवी-देवताओं को याद करते हैं व उनकी पूजा करते हैं, इसी पूजा की विधि को जागर के नाम से भी जाना जाता है. जो एक लोकगीत शैली होने के साथ-साथ देवताओं व भूत प्रेतों को मनुष्य शरीर में जागृत करने की एक पूरी प्रक्रिया है .गढवाल में जागर गीतों के महत्व को यहां के जनमानस के सन्दर्भ में समझने के लिए जागर-प्रक्रिया से प्रत्यक्षतः प्रभावित हुए लोगों के जीवन में जागर के प्रभाव का पूर्ण घटनाक्रम अध्ययन कर उसका विवरण दिया गया है. इस के लिए सम्बन्धित क्षेत्र में जाकर साक्षात्कार व क्षेत्र अध्ययन के माध्यम से यह शोध-कार्य सम्पन्न किया गया है और सम्बन्धित प्रसंग इस शोध-पत्र में समाहित किए गए हैं.
Prasad, Shivnarayan and Alkeshika Bhatta. "उत्तराखंड लोक संगीत: गढ़वाल के लोकगीतों में जागर का महत्व (Uttarakhand Lok Sangeet: Garhwal ke Lok Geeto me Jagar ka Mahtva)." Sangeet Galaxy, vol. 11, no. 2, July 2022, pp. 203-210.