झारखंड के पारंपरिक लुप्तप्राय वाद्य यंत्र : एक अवलोकन

Abstract

पारंपररक वाद्य यंत्र वेवाद्य यंत्रहोतेहैंजो ककसी कवकिष्ट संस्कृकत, समुदाय यादेि की सांस्कृकतक पहचान का कहस्सा होते हैं. इनका उपयोग धाकमिक, सामाकजक और सांस्कृकतक गकतकवकधयों में ककया जाता है- जैसे अखरा (गााँव का वह स्थान जहां सांस्कृकतक गकतकवकधयांहोती ह)ैंजतरा (मेला) या आाँगन मेंनाचन-ेगानेतथा किकार जानेसेपूवि सूचना देनेया लोक उत्सव, जन्म, कववाह और मत्ृयुकेसमय. इन जनजातीय पारंपररक वाद्य यंत्रों की ध्वकनयााँउस समाज के रीकत-ररवाज, कवश्वास और जीवनिैली को दिािती हैं. येवाद्य यंत्रपीढी-दर-पीढी अपनेमूल रूप मेंसंचाररत होतेहैंऔर ककसी संस्कृकत के महत्वपूर्िघटक के रूप मेंपहचानेजातेह.ैंभारत सांस्कृकतक कवकवधता के कारर् पारंपररक वाद्य यंत्रों कीउपलब्धता मेंधनीह.ैमैं इस लेख के माध्यम से आकदवासी बहुल राज्य झारखंड केपारंपररक तथा जनजातीय लुप्तप्राय वाद्य यंत्रों और इसे बनाने की पद्धकत के कवषय में बात करूं गा. इसका मुख्य उद्देश्य झारखंड केपारंपररक और लुप्तप्राय वाद्य यंत्रों केकवषय मेंजानकारी एवंउनकेकनमािर् की प्रकिया से अवगत कराना है ताकक इस कमट्टी की सांस्कृकतक कवकवधता, और पारंपररक वाद्य यंत्रों का एक अवलोकन प्रस्तुत कर सकाँू.

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Citation

तसनीम, अशोक गोप और शाकिर. "झारखंड के पारंपरिक लुप्तप्राय वाद्य यंत्र : एक अवलोकन." Sangeet Galaxy, vol. 14, no. 2, 2025, pp. 126-140.

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