भारतीय लोक संगीत का आधार स्तंभ: ढोलक का ऐतिहासिक, संरचनात्मक एवं सांस्कृतिक विश्लेषण

Abstract

प्रस्तुत शोध लेख भारतीय लोक संगीत के सर्वाधिक लोकप्रिय एवं अपरिहार्य अवनद्ध वाद्य 'ढोलक' के ऐतिहासिक, संरचनात्मक और सांस्कृतिक पक्षों का व्यापक विश्लेषण करता है. प्राचीन 'पटह' से आधुनिक ढोलक तक के विकासवादी सफर को रेखांकित करते हुए यह अध्ययन स्पष्ट करता है कि किस प्रकार इस वाद्य ने सदियों से अपनी मौलिकता को सुरक्षित रखा है. लेख में ढोलक के निर्माण में प्रयुक्त विशिष्ट काष्ठ (जैसे शीशम, आम, सागवान) और चर्म-शोधन की तकनीकी प्रक्रियाओं का विस्तार से वर्णन किया गया है. साथ ही, वाद्य के तकनीकी अंगों जैसे 'मसाला' (लेप) और स्वर-नियोजन की प्रणालियों (डोरी-छल्ले बनाम नट-बोल्ट) के ध्वनि-विज्ञान पर पड़ने वाले प्रभाव की विवेचना की गई है. पुरातात्विक साक्ष्यों के रूप में पश्चिम बंगाल के टेराकोटा मंदिरों के चित्रणों का संदर्भ लेते हुए यह लेख ढोलक की प्राचीनता और सामाजिक व्यापकता को पुष्ट करता है. अंततः, यह शोध स्पष्ट करता है कि ढोलक केवल एक लोक वाद्य नहीं, बल्कि भारतीय संगीत के लोक एवं शास्त्रीय पक्षों के मध्य समन्वय स्थापित करने वाली एक महत्वपूर्ण धरोहर है.

PDF Attachment

Download

Citation

Vishwakarma, Suraj Kumar, Ch, and an Vishwakarma. "भारतीय लोक संगीत का आधार स्तंभ: ढोलक का ऐतिहासिक, संरचनात्मक एवं सांस्कृतिक विश्लेषण." Sangeet Galaxy 15, no. 2 (2026): 140-145.

Share:

Share
WhatsApp
URL has been copied successfully!