Saraikela Chhau Nritya me Aahaaryabhinay (Amoort Saanskratik Virasat)

Abstract

भारतीय इतिहास प्राचीन काल से ही अपनी समृद्ध संस्कृति कला और साहित्य की अनेक गौरवशाली परंपराओं को समेटे चला आ रहा है, जिसमें अनेक धार्मिक लोक-कलाएं, परंपराएं, नृत्य शैलियां एवं नाटकों ने जन्म लिया. इनमें शास्त्रीय नृत्य शैलियां- ओडीशी, मणिपुरी, भरतनाट्यम, कथक इत्यादि, लोक नृत्य शैलियां- गरबा, कालबेलिया, बिहू, गिद्धा इत्यादि, लोकनाट्य शैलियां- यक्षगान, नौटंकी, रामलीला इत्यादि प्रमुख हैं. छउ भी इन्हीं नृत्य शैलियों में से एक है, जो अपने सामरिक कला अर्थात मार्शल-आर्ट, फरिखंडा-कला तथा युद्ध-नृत्य कला जैसे: शिकारी, अस्त्र-द्वंद, तलवार और ढाल का खेल आदि के अद्भुत शारीरिक संचालनों व हस्त-पाद की स्थितियों के सुंदर समन्वय तथा इन्हीं स्वरूपों के अनुसार लकड़ी, बास, मिट्टी, प्लास्टिक आदि से बने विचित्र किंतु आकर्षक मुखौटों व चटकीले-चमकदार वस्त्राभूषणों के कारण प्राचीन समय से ही अपनी इस नृत्य-कला की संस्कृति को संजोए हुए चला आ रहा है और यह नृत्य न केवल भारत में अपितु विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना चुका है. सराईकेला छउ एक प्रसिद्ध लोक नृत्य शैली है किन्तु इसमें शास्त्रीय तत्व भी विद्यमान है. इसके वस्त्र-आभूषण, मुकुट, मुखौटे आदि की निर्माण प्रक्रिया भरत कृत नाट्यशास्त्रीय आहार्याभिनय के तत्त्व संजीव, अंग रचना, अलंकार व पुस्त आदि से भी साम्यता रखती है. प्रस्तुत शोध पत्र का प्रमुख उद्देश्य सराईकेला छउ नृत्य के आहार्य अभिनय में नाट्यशास्त्रीय आहार्याभिनय के तत्त्वों को स्थापित करना है.

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Citation

Patel, Aprajita and Dr. Vidhi Nagar. "Saraikela Chhau Nritya me Aahaaryabhinay (Amoort Saanskratik Virasat)." Sangeet Galaxy, vol. 11, no. 1, pp. 160-169.

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